गुरु की भक्ति केवल प्रभु को पाने के करनी चाहिए: पंकज जी महाराज
मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम में गुरु पूर्णिमा सत्संग मेला में बुधवार प्रातः सांस्थाध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज ने गुरु का ध्यान किया और अनमोल मानव शरीर, कर्म, शाकाहार, शरीर में छुपे मन रूपी दुश्मन आदि के बारे में विस्तार से बताया।
महाराज जी ने कहा कि जिस प्रकार समुद्र की लहरों का संबंध समुद्र के साथ होता है, उसी तरह गुरु का संबंध शब्द के साथ होता है। इसलिए गुरु के ध्यान के माध्यम से शब्द सुरत को खींच कर अपने में मिला लेता है। ऐसी दशा में मन दुनिया की तरफ से सो जाता है और ईश्वर की तरफ से जाग जाता है। यानि प्रभु की तरफ से आंख वाला हो जाता है। जब तक हमारे मन का झुकाव आंखों के नीचे है तब तक हम इंद्रियों के भोग वासनाओं में रमे हुए हैं। मन एक ही है, चाहे उसे दुनिया में लगाएं या गुरु की भक्ति में लगाएं। वह एक समय में एक ही जगह लगेगा। जब मन को दुनिया के प्यार से ऊंचा गुरु का प्यार मिलता है, तब मन दुनिया के मोह-प्यार को छोड़ने लगता है। गुरु की भक्ति केवल ईश्वर को पाने के लिए करनी चाहिए। ‘‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा जो जस करै सो तस फल चाखा।’’ पंक्ति का अर्थ बताते हुए कहा कि यह कर्म प्रधान देश है। कर्म से काया बनती है और काया से कर्म। युग बदलते रहते हैं, लेकिन कर्मों का कानून अटल है सदा से चला आ रहा है। बुरे कर्म यदि लोहे की जंजीर के समान हैं तो अच्छे कर्म सोने की बेड़ियां हैं। महात्माओं के सत्संग में आने से वे कर्मों की माफी करा देते हैं। अपने घर सतलोक चलने की आशा बांधनी चाहिए। अबकी बार सौभाग्य से मनुष्य शरीर और गुरु मिल गए हैं। इसलिए उनके आदेशों का पालन कर अपने कर्मों की धुलाई करवा लेनी चाहिए। सभी बच्चों में विद्या की ताकत छिपी होती है, लेकिन जो बच्चा स्कूल जाता है और गुरुजनों का कहना मानता है उसमें छिपी हुई ताकत जाग जाती है। जो स्कूल नहीं जाते हैं और गुरुजन की आज्ञा का उल्लंघन करते हैं उनके ज्ञान की ताकत छिपी हुई ही रहती है और ऐसे ही चली जाती है।
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गुरु पूर्णिमा पर जय गुरुदेव आश्रम में सिमटा लघु भारत
-नाम योग साधना मंदिर और सत्संग भवन में किया गुरु पूजन
-श्रद्धालुओं ने की सेवा, यातायात व्यवस्था संभाली और भंडारे लगाए

मथुरा, 29 जुलाई। हाईवे स्थित जय गुरुदेव आश्रम में तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा सत्संग मेला में देश के कोने कोने से श्रद्धालु उमड़े। लाखों की संख्या में आए गुरु भक्तों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो समूचा भारत आश्रम में सिमटा गया हो। यहां लघु भारत के दर्शन हो रहे थे। श्रद्धालुओं ने सेवादारी की, यातायात व्यवस्था संभाली और भंडारे लगाकर असंख्य लोगों को प्रसाद वितरण किया।
 
गुरु पूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत संस्थाध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज ने नाम योग साधना मंदिर और सत्संग भवन में गुरु पूजा, ध्यान और आरती के साथ की। इस अवसर पर महाराज जी ने गुरु जी की तस्वीर पर चंदन टीका लगाया और आरती की। इसके बाद ध्यान लगाकर पूज्य गुरु जी का स्मरण किया। श्रद्धालुओं ने लाइनों में लग कर अपने गुरु से दया याचना मांगी। उन्होंने नामदान देकर बताया गया कि यह ‘जयगुरुदेव’ नाम का जहाज हमारे गुरु महाराज बाबा जयगुरुदेव ने लगाया है। दुनिया के जो जीव ‘जयगुरुदेव’ नाम का जाप करेंगे उनका भौतिक और आत्मिक कल्याण होगा।  

इसके बाद महाराज जी ने लाखों श्रद्धालुओं को प्रवचन दिए और नामदान दिया। प्रवचन समापन के बाद गुरु भक्तों ने महाराज जी के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। आश्रम परिसर में दिनभर सैकड़ों भंडारे चलाए गए, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने प्रसाद पाया। बुधवार रात्रि में दर्जनों जोड़ों का दहेज रहित विवाह भी कराया जाएगा।

 दिसंबर में होगा दादा गुरु जी का वार्षिक भंडारा
इस अवसर पर पंकज महाराज जी ने दादा गुरु जी स्वामी घूरेलाल जी महाराज का वार्षिक भंडारा 17 से 21 दिसंबर तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में मनाए जाने की घोषणा की। उन्होंने सभी को सपरिवार उसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

साइकिल यात्रा निकलने का आह्वान
 वार्षिक भंडारा कार्यक्रम से पहले सभी जिलों में शाकाहार -सदाचार, मद्यनिषेध के प्रचार के लिए बड़े स्तर पर जिलास्तरीय साइकिल यात्रा निकालने का आह्वान किया गया। विदित हो कि पूज्य पंकज जी महाराज 20 अगस्त को मीरजापुर जिले में 108 दिवसीय सत्संग भ्रमण पर निकलेंगे।