जिंदगी से हारे, आर्थिक तंगी के मारे बृजगोपाल को मिली केएम में नई जिंदगी हड्डी गले कूल्हा का केएम अस्पताल में हुआ दवाईयों के खर्चे पर निःशुल्क प्रत्यारोपण
मथुरा। केएम अस्पताल के अस्थि रोग विभाग में घुटना प्रत्यारोपण एवं कूल्हा प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जाती है। पहले जिन मरीजों को ऐसे ऑपरेशन के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था और लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब ब्रजवासियों को केएम अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षित उपचार मिल रहा है। ऐसा ही एक ऑपरेशन देखने को मिला है, जिसमें जिंदगी से हारे, आर्थिक तंगी के मारे 40 वर्षीय ब्रजगोपाल के लिए केएम अस्पताल मसीहा साबित हुआ है, यहां लाखों रुपए से होने वाला ऑपरेशन, दवाईयों के खर्चे पर निःशुल्क किया गया है। नई जिन्दगी पाकर खुश हुए मरीज ने चिकित्सकों की टीम और अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया है, वहीं अस्पताल के चेयरमैन एवं केएम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने इस सफल सर्जरी के लिए अस्थि रोग विभाग की टीम को बधाई दी है।
बिहार निवासी 40 वर्षीय बृजगोपाल का पांच माह पूर्व हुए सड़क हादसे में कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। हादसे के दोषी व्यक्ति ने निजी अस्पताल में ब्रजगोपाल के कूल्हे का इलाज कराया, लेकिन एक सप्ताह बाद वह चलने-फिरने से लाचार हो गया। उसकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, जिसके कारण वह कई अस्पताल में पहुंचा लेकिन पैसा न होने के कारण वह व्हीलचेयर के सहारे तक ही सीमित रह गया। चार माह बाद बृजगोपाल केएम अस्पताल में पहुंचा जहां हड्डी विभागाध्यक्ष डा. हर्षित जैन, डा. ललित राघव, डा. रामधन नारानिया ने मरीज की प्रारंभिक जांच कराई तो पता चला कि उसके कूल्हे की हड्डी गल चुकी है, जॉइंट रिप्लेसमेंट ही मरीज को नई जिंदगी दे सकता है। आयुष्मान न होने के कारण मरीज ने अस्थि विभागाध्यक्ष और उनकी टीम से सहयोग करने की गुहार लगाई और एचओडी डा. हर्षित जैन व उनकी टीम विवि के कुलाधिपति किशन चौधरी से मिले और ब्रजगोपाल की दयनीय स्थिति की जानकारी दी। कुलाधिपति के निर्देश पर ब्रजगोपाल का दवाईयों के खर्चें पर डा. ललित राघव, डा. रामधन, डा. आशीष शर्मा, डा. विराज मिश्रा एवं एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डा. अंचल जैन, डा. दीक्षा की विशेषज्ञ टीम निःशुल्क कूल्हा प्रत्यारोपण किया। आज बृजगोपाल स्वस्थ है, चल फिर रहा है।
मरीज बृजगोपाल ने बताया उन्हें लंबे समय से कूल्हा की हड्डी गल जाने से चलना-फिरना नहीं हो पा रहा था। उन्होंने पहले निजी अस्पताल में परामर्श लिया था, जहां सर्जरी के लिए लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक रूप से यह उनके लिए काफी कठिन था। सफल ऑपरेशन के बाद अब उनके पैर में कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही वे चलने लगे थे और अब वे पूरी तरह सहज और आत्मविश्वास के साथ चल-फिर पा रहे हैं।
अस्थि रोग विशेषज्ञ व विभागध्यक्ष डा. हर्षित जैन ने बताया गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, दुर्घटना के बाद जोड़ों की क्षति अथवा लंबे समय से घुटने और कूल्हे के असहनीय दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अत्यंत प्रभावी उपचार है। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद मरीजों के दर्द में उल्लेखनीय कमी आती है और वे तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौटते हैं। चलने-फिरने की क्षमता में सुधार होने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि घुटने या कूल्हे की पुरानी समस्या को नजरअंदाज न करें और समय रहते अस्थि रोग विभाग की ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर उचित उपचार कराएं।
अस्पताल अधीक्षक डा. अभय सूद ने बताया कि अस्पताल में घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण की सुविधा अत्याधुनिक तकनीक और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत उपलब्ध है। अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डा. हर्षित जैन, डा. ललित राघव, डा. रामधन, डा. आशीष शर्मा, डा. विराज मिश्रा एवं एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डा. अंचल जैन, डा. दीक्षा की विशेषज्ञ टीम द्वारा इन सर्जरी को पूर्ण सुरक्षा और दक्षता के साथ किया जा रहा है। विगत वर्षों 250 से अधिक सफल जॉइंट रिप्लेशमेंट किए गए हैं, इसमें न केवल उत्कृष्ट हड्डी रोग अपितु निश्चेतना व मेडीसन विभाग के चिकित्सकों एवं केएम हॉस्पिटल के मैनेजमेंट का भी योगदान रहा है।
कुलाधिपति किशन चौधरी ने बताया निजी अस्पतालों में प्रति जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी पर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि केएम अस्पताल में मरीजों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत निःशुल्क एवं उच्चस्तरीय उपचार मिल रहा है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि जिले के लोगों को अपने ही शहर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ भी मिल रहा है। शिक्षा व स्वास्थ्य मेरी पहली प्राथमिकता रही है, बेटियों को निःशुल्क शिक्षा, गरीब-असहायों का दवाईयों के खर्चें पर फ्री ऑपरेशन किया जा रहा है।