उत्तर भारत के हर तरह के नेत्र रोगियों को एक छत के नीचे मिलेगा सभी नेत्र रोगों का समाधान मथुरा - गोवर्धन के मध्य बने कल्याणं करोति नेत्र संस्थान का समारोह पूर्वक हुआ शुभारंभ
मथुरा। ब्रज की धरती चमत्कारी धरती है। यहां की हवा में बांसुरी की धुन बसी है। यहां के कण-कण में राधा-कृष्ण बसे हैं। ऐसी धरा पर कल्याणं करोति का नेत्र संस्थान लाखों लोगों के जीवन से अंधेरा दूर करने का काम कर रहा है। मथुरा में उत्तर भारत का सर्वश्रेष्ठ नेत्र चिकित्सा संस्थान संकल्प के दम पर तैयार हुआ है। किसी के जीवन में प्रकाश भरने से बड़ा कोई पुण्य नहीं। 200 बैड की क्षमता वाला यह संस्थान उत्तरोत्तर प्रगति करेगा।
यह उद्गार गोवर्धन रोड पर नव निर्मित कल्याणं करोति नेत्र संस्थान के शुभारंभ अवसर पर अतिथियों ने व्यक्त किए। मुख्य अतिथि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है कि तुम 100 हाथों से कमाओ और हजार हाथ से दान करो। संस्थान सचिव सुनील शर्मा जी ने जो सपना देखा उसे साकार किया। वह एक लाख शरीरों को संसार से जोड़ने का काम पूरा कर चुके हैं। 7 करोड़ लोग नेत्र हीन हैं। इनमें से 80 फीसद को उपचार मिला होता तो वह भी दुनिया देख पाते। कल्याणं करोति के इस यज्ञ की रोशनी से लाखों लोग लाभान्वित होंगे। यह नेत्र संस्थान शोध संस्थान बनेगा ताकि दुनिया को लाभ हो।
संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि यह
खाली जेब वाले का चमत्कार है। मथुरा में इतना बड़ा अस्पताल खड़ा कर दिया। किसी के जीवन में रोशनी भरने के समान कोई पुण्य नहीं होता। यह दान देने वालों का प्रकाश है। संकल्प दृढ़ हो तो कुछ भी असम्भव है।
संत कौशल किशोर महाराज ने कहा कि शास्त्रों में परोपकार को सबसे बड़ा पुण्य कृत्य कहा गया है। पिता की मृत्यु के बाद बेटे हर जगह से उसका नाम काट देते हैं लेकिन दान दाता का नाम अमर रहता है।
रमेश गनात्रा , रमेश उमा गनात्रा फेमिली फाउंडेशन यूएसए के कहा कि संस्थान के समर्पण और सेवा भाव ने हमें यहां आने और सहयोग करने को विवश कर दिया।
डीआईजी शैलेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि
प्रकृति सृष्टि की अनूठी कृति है लेकिन इसका आनंद बगैर नेत्रों के नहीं लिया जा सकता है। इस क्षेत्र में कल्याणं करोति का यह नैत्र संस्थान समूचे भारत के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
शेखर बजाज चेयरमैन जमुना लाल बजाज फाउण्डेशन, गिरीश त्रिपाठी पूर्व कुलाधिपति बीएचयू एवं जीएलए कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने भी नेत्र संस्थान से लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई। इस दौरान 11बच्चों को चश्मा वितरण किया गया।
संस्था अध्यक्ष बाबा बलराम दास ने कहा कि महामना वहीं हैं जो समाज के काम आएं। कल्याणं करोति सेवा में एकरस थी, है ओर रहेगी।
मेघश्याम सिंह विधायक गोवर्धन ने कहा कि ब्रज में सेवा करना आलौकिक कार्य है। महेशानंद सरस्वती ने कहा कि संस्थान से किसी भी रूप में जुड़ा व्यक्ति पुण्य का भागी है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गणेश के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर किया। संचालन करते हुए समाज के हर वर्ग के सहयोगियों का आभार संस्थान सचिव सुनील कुमार शर्मा ने जताया।
कार्यक्रम में ओम प्रकाश धानुका कोलकाता, नयन दलाल यूएसए , अदिश जैन यूएसए, उमाकांत अग्रवाल, धनेश मित्तल, कल्याण दास अग्रवाल, दीनानाथ अग्रवाल, बीड़ी अग्रवाल, राजेश उनेहिया, राधेश्याम सिंघल, आनंद अग्रवाल, कृष्ण कुमार खण्डेलवाल, रवि मेहरा, अतुल शर्मा वैद्यनाथ, ललित अरोड़ा, ललित ग्रोवर मुम्बई, मीना उमेश शाह , मूलचंद गर्ग, हृदेश शर्मा, प्रवीण भारद्वाज, कन्हैया अग्रवाल, सात्विक उपाध्याय, श्रीमती ब्रजेश शर्मा, प्रीतम चौधरी, केके खण्डेलवाल, निरूपण भार्गव, ज्ञानेंद्र राणा, आनंद शर्मा के देश- विदेश व जनपद के अनेक गणमान्य जन मौजूद रहे।
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प्रकल्प में विशेष सहयोगी शंकरा आई फाउंडेशन यूएसए के चेयरमैन मुरली कृष्णमूर्ति -
नेत्र चिकित्सा: अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा
हम सब जानते हैं कि आंखें केवल देखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारे सपनों, आशाओं, और भविष्य की खिड़की हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी दृष्टि खोता है, तो वह केवल रोशनी ही नहीं खोता, बल्कि अपने सपनों को भी धुंधला होते देखता है। लेकिन इस संस्थान के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लाखों लोगों के जीवन में फिर से रोशनी लौट सके।
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नारायणदास अग्रवाल, कुलाधिपति जीएलए विविध, मथुरा
सेवा और समर्पण का प्रतीक
कल्याणं करोति नेत्र संस्थान न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का केंद्र होगा, बल्कि यह सेवा, करुणा और मानवता का प्रतीक बनेगा। यहां आने वाले हर मरीज को न केवल चिकित्सा सहायता मिलेगी, बल्कि उसे यह विश्वास भी मिलेगा कि वह अकेला नहीं है। यह संस्थान उन गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए एक वरदान साबित होगा, जिनके पास इलाज के साधन नहीं हैं।
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मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी
दोस्तों, सेवा का यह कार्य केवल एक संस्थान का नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में यह कदम हमें यह याद दिलाता है कि जब हम दूसरों की मदद के लिए आगे बढ़ते हैं, तो हम मानवता को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हैं।
शिक्षा और अनुसंधान का केंद्र
यह संस्थान न केवल इलाज का केंद्र होगा, बल्कि यहां नए चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे भी इस मिशन को आगे बढ़ा सकें। यह केवल मथुरा के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बनेगा।