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Tuesday, 18th June,
2019
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित एग्री-टेक, प्लांट और हेल्थ साइंसेज पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन, आईसीएआर आईआईएचआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बसवप्रभु एल. पाटिल ने पौधों में होने वाली वायरल बीमारियों के खतरे और उन्हें नियंत्रित करने के लिए बायोटेक्नोलॉजिकल उपायों पर बात की। संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. रघुराम भट्टा ने मानव पोषण और स्वास्थ्य पर विस्तार से जानकारियां दीं जबकि मैकगिल विश्वविद्यालय, कनाडा के डॉ. इब्राहिम नोरूज़ी ने खाद्य और पेय उद्योग में व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक कार्य सुरक्षा, कर्मचारियों को दुर्घटनाओं/घटनाओं से बचाने के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाने हेतु अपनाए जाने वाले उपायों की एक श्रृंखला है। जब हम सामान्य तौर पर व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा (ओएचएस) के बारे में सोचते हैं, तो विशेष रूप से निर्माण, खनन और धातु क्षेत्र पहले स्थान पर आते हैं। हालांकि, कर्मचारियों, मशीनरी और उपकरणों की संख्या को देखते हुए, खाद्य उद्योग व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रथाओं के मामले में एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। डा. इब्राहिम ने बताया कि खाद्य उद्योग में व्यावसायिक सुरक्षा के संदर्भ में विभिन्न जोखिम और अवसर मौजूद हैं। कच्चे माल के उत्पादन से लेकर, बिजली, उत्पादन लाइनें और मशीनरी, उपयोग किए जाने वाले उपकरण, रसायन, अस्थायी/मौसमी श्रमिकों की आवाजाही, मौसमी कार्य, भंडारण और परिवहन आदि जैसे कई व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम हो सकते हैं। खाद्य उद्योग में लागू खाद्य सुरक्षा नियम व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों का भी समर्थन करते हैं; इसका सबसे अच्छा उदाहरण कोविड-19 महामारी है। व्यक्तिगत स्वच्छता नियम, जैसे हाथ धोना, खाद्य उद्योग में वर्षों से लागू हैं, और इस संबंध में कर्मचारियों का प्रशिक्षण और दक्षता उच्च स्तर पर है। व्यावसायिक स्वास्थ्य; कर्मचारियों के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्वास्थ्य को उच्चतम स्तर पर बनाए रखता है, कर्मचारियों को व्यावसायिक रोगों से बचाता है और कार्य परिस्थितियों एवं उत्पादन साधनों को स्वास्थ्य के अनुकूल बनाने का प्रयास करता है। यह कर्मचारियों को कार्य वातावरण के सभी हानिकारक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह इंजीनियरिंग और चिकित्सा विषयों पर आधारित एक एकीकृत विज्ञान है। इसके अलावा, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. प्रवीण प्रकाश ने मेलाटोनिन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि कटाई के बाद फसलों की शेल्फ-लाइफ (भंडारण अवधि) बढ़ाने और उनमें तनाव प्रतिक्रिया को कम करने में इसकी क्या भूमिका है। वहीं, वेन स्टेट यूनिवर्सिटी, मिशिगन, अमेरिका के अनुसंधान वैज्ञानिक डॉ. ज़ीशान अहमद ने बैक्टीरियल एंडोफ्थेलमाइटिस में लिपिड पेरोक्सीडेशन और आयरन के जमाव से होने वाले फेरोप्टोसिस के बारे में जानकारी दी। एमपीयूएटी, उदयपुर के पूर्व कुलपति और आईसीएआर, नई दिल्ली में कृषि शिक्षा के पूर्व डीडीजी डॉ. एन. एस. राठौड़ ने नवाचार और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. विजया तोमर को पुरस्कार प्रदान किया। इस दिन विभिन्न सत्रों में बड़ी संख्या में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभी मुख्य वक्ताओं, तथा विभिन्न सत्रों के अध्यक्षों और सह-अध्यक्षों को सम्मानित किया गया।
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