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संस्कृति विवि में हुई सेमिनार में वक्ताओं ने बताया वैदिक गणित का महत्व

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय मथुरा एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में आधुनिक युग में ‘वैदिक गणित की प्रासंगिकता’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में कहा गया कि जितना महत्वपूर्ण आधुनिक विज्ञान है उतना ही महत्वपूर्ण भारतीय प्राचीन ज्ञान। मुख्य वक्ता शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांतीय संयोजक व वैदिक गणितज्ञ प्रो अनोखे लाल पाठक ने कहा कि वैदिक गणित का नियमित अभ्यास करने से मस्तिष्क पांच से छः गुना तीव्र हो जाता है ।

मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के अनुसार प्राच्य भारतीय ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान विद्यार्थी के सम्पूर्ण शैक्षिक एवं कौशल विकास के लिए आवश्यक है। वैदिक गणित के सूत्रों को वेदों का अनुसंधान करके जगद्गुरु शंकराचार्य भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज ने निकाला है। जो आधुनिक गणित के अंकगणित, बीजगणित, त्रिकोणमिति, कैलकुलस, निर्देशांक ज्यामिति, कम्प्यूटर विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है।

उन्होंने कहा कि वैदिक गणित का नियमित अभ्यास करने से मस्तिष्क पांच से छः गुना तीव्र हो जाता है। विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति डॉ सचिन गुप्ता व सीईओ डा मीनाक्षी शर्मा ने सभी छात्रों को भारतीय ज्ञान -विज्ञान की बौद्धिक विरासत पर गौरवान्वित होने के लिए शुभकामनाएं प्रदान की ।
डीन छात्र कल्याण डा डी एस तोमर ने कहा कि आज के दौर की प्रतियोगी परीक्षाओं में गणित किसी न किसी रूप में परीक्षा में पूछे जाते है तथा कम समय में प्रश्नों के सही उत्तर देने होते हैं जोकि वैदिक गणित के अभ्यास से संभव है। डीन एकेडमिक डा मीनू गुप्ता ने मुख्य वक्ता को विश्वविद्यालय की ओर स्मृति चिन्ह्न भेंट किया। कार्यक्रम का संयोजकत्व सांइस क्लब तथा संचालन पायल श्रीवास्तव ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता का स्वागत डा नेहा पाठक के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डा कुंदन चौबे ने सभी का आभार व्यक्त किया

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