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संस्कृति विवि में स्वामी विवेकानंद के कृतित्व की प्रासंगिकता पर हुई सेमिनार

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सेमिनार में छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानन्दजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की प्रासंगिकता पर अपने-अपने शोधपरक विचार व्यक्त किये। सेमिनार में वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी और वैचारिक मजबूती के महत्व पर प्रकाश डाला।
छात्र सौरभ द्विवेदी ने कविता के रूप में अपनी रोचक प्रस्तुति देते हुए कहा कि वो 40 मे ही युवाओं को राह दिखाकर चले गये, हर आदमी को अपना बना कर चले गये। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने नासिक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन का भी श्रवण किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डा मीनू गुप्ता ने कहा कि विकसित भारत के लिए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवाओं के लिए स्वामी विवेकानन्द जी का जीवन-दर्शन प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सूट-बूट व पालिश से नहीं बल्कि चरित्र निर्माण से व्यक्तित्व का निर्माण होता है। डायरेक्टर आफ़ एप्लाइड पालिटिक्स डा रजनीश त्यागी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी जन्म से ही कुशाग्रबुद्धि व तार्किक शक्ति के धनी थे और उन्होंने भारतीय कला व संस्कृति के महत्व को विश्व पटल पर अपने अभिभाषण व कार्य व्यवहार से प्रसारित किया।
विश्वविद्यालय के डीन आफ स्टूडेंट वेलफेयर डा डी एस तोमर ने युवाशक्ति को शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त और सकक्षम बनाने के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न क्लबों में अपनी- अपनी नैसर्गिक प्रतिभाओं के साथ सहभागिता सुनिश्चित करनेके लिए प्रेरित किया। विशिष्ट वक्ताओं में प्रो रतीश शर्मा व डीन आफ स्टूडेंट वेलफेयर डा. डी एस तोमर थे। कार्यक्रम का संचालन डा नीलम कुमारी ने किया। कार्यक्रम के अंत में गौरव सारंग ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर शिक्षकों के साथ युवाओं की आवाज के रूप में विभिन्न क्लबों,एन .सी.सी, एन.एस.एस के छात्र भी उपस्थित रहे।

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