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संस्कृति विवि में शुरू हुआ कानूनी सहायता क्लीनिक

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज द्वारा अपना कानूनी सहायता क्लिनिक शुरू किया गया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कानूनी सहायता के क्षेत्र में यह क्लीनिक एक मील का पत्थर साबित होगा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुश्री सौम्या आनंद, सहायक अभियोजन अधिकारी बिहार और प्रवर्तन निदेशालय में पूर्व कानूनी सलाहकार ने समाज के सभी वर्गों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में कानूनी सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल आफ लॉ एंड लीगल स्टडीज द्वारा किया गया यह कार्य बहुत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि न्याय चाहने वाले किसी भी व्यक्ति को कानूनी सहायता यदि समय पर मिल जाए तो इससे बड़ा कोई कार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि समाज में बहुत सारे लोग हैं जिन्हें अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी नहीं होती, बहुते से ऐसे हैं जो जानकारी तो रखते हैं लेकिन उन अधिकारों के लिए अपने इन अधिकारों की रक्षा के लिए सहज कानूनी सहायता नहीं मिलती। ऐसे लोगों की मदद के लिए यह क्लीनिक बहुत बड़ी मदद साबित हो सकता है।
सुश्री सौम्या आनंद ने न्याय और समानता को बनाए रखने के लिए कानूनी पेशेवरों की नैतिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कानूनी सहायता क्लिनिक स्थापित करने की पहल के लिए संस्कृति विश्वविद्यालय की सराहना की और छात्रों से कानूनी सहायता गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सौम्या आनंद ने स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज के छात्रों के साथ प्रश्नावली सत्र में भी भाग लिया। इस सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए अनेक सवाल पूछे, जिनका मुख्य अतिथि ने संतुष्टिपूर्ण जवाब भी दिया और विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि की।
कानूनी सहायता क्लीनिक के उद्घाटन समारोह की शुरुआत एसएलएलएस, संस्कृति विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर हरि मोहन मित्तल के उद्घाटन भाषण से हुई, जिन्होंने वंचित समुदायों को कानूनी सहायता प्रदान करने और जनता के बीच कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने में कानूनी सहायता क्लीनिक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि

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