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जय गुरुदेव महाराज का 12 वां वार्षिक भंडारा शुरू,उमड़े भक्त

मथुरा 17 मई। बाईपास स्थित जयगुरुदेव आश्रम में बाबा जयगुरुदेव जी महाराज का बारहवाँ वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला प्रारम्भ हो गया है। प्रातःकाल उपदेशक बाबूराम जी ने अपने प्रवचन में कहा सन्त महात्मा सबकी भलाई का काम करते हैं और वे ‘सबहिं सुलभ सब दिन सब देशा’ उक्त को चरितार्थ करते हैं। अगर उनसे लाभ न ले सके तो मानव का दुर्भाग्य है। धर्म ग्रन्थ उन महापुरुषों की साधना के दस्तावेज हैं उनका अर्थ तभी समझ में आ सकता है। जब उस श्रेणी के महापुरुष मिल जायें। वास्तव में पुस्तकों को महात्माओं ने बनाया न कि पुस्तकों न महात्माओं को बनाया। जीवात्मा दोनों आंखों के मध्य में विराजमान है उसी में अलौकिक सृष्टि को देखने की आँख दिव्य दृष्टि है, उसके खुलने पर व्यक्ति त्रिकालदर्शी हो जाता है। देवी, देवताओं और ऊपरी मण्डलों के दर्शन होने लगते हैं। सन्तमत की साधना सबसे सरल और गृहस्थ आश्रम में रहकर की जा सकती है। इसके लिये किसी प्रभु की प्राप्ति करने वाले सन्त सत्गुरु की आवश्यकता है। महापुरुष दीनता, नम्रता, पे्रम, सम्मान, शिष्टाचार सिखाते हैं। जीवन के असली लक्ष्य की प्राप्ति कराते हैं।
उपदेशक सतीश चन्द्र जी ने कहा परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी के जीवन पर्यन्त अथक परिश्रम करके करोड़ों लोगों को शाकाहार-सदाचार अपनाने व नशा त्याग की पे्ररणा देकर भगवत भजन में लगाया। इस समय उनकी पुण्य स्मृति में वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला आयोजित हो रहा है। आत्म कल्याण करना जीवन का परम लक्ष्य है। इसके लिये समर्थ गुरु की आवश्यकता है। सत्गुरु की महिमा अनन्त है। श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी है।

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