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जीएल बजाज के छात्र-छात्राओं ने शतरंज की बिसात पर दिखाई बौद्धिक क्षमतापराग उपाध्याय को हराकर शिवा गौतम बने चैम्पियन

मथुरा। जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस में आयोजित शतरंज प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपनी बौद्धिक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। खिताबी मुकाबला बीटेक (सीएसई) के शिवा गौतम और बीटेक (सीएसई एआई और एमएल) में अध्ययनरत पराग उपाध्याय के बीच खेला गया। कांटे के मुकाबले में शिवा ने पराग को पराजित कर खिताबी जीत दर्ज की। इससे पूर्व प्रतियोगिता का शुभारम्भ जीएल बजाज की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने शतरंज की बिसात पर चाल चलकर किया।
प्रतियोगिता के शुभारम्भ अवसर पर प्रो. अवस्थी ने छात्र-छात्राओं को बताया कि शतरंज दुनिया के सबसे पुराने एवं सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है। शतरंज ऐसा खेल है, जिसमें किसी भी तरह की शारीरिक ऊर्जा नहीं लगती। इसे छोटी सी जगह पर खेला जा सकता है। उन्होंने कहा कि शतरंज शारीरिक तो नहीं बल्कि एक बौद्धिक और मनोरंजक खेल जरूर है, जिसे देश और दुनिया के लोग पसंद करते हैं। भारत समेत दुनियाभर के सैकड़ों-हजारों खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने इस खेल से काफी शोहरत हासिल की है।
प्रो. अवस्थी ने कहा कि शतरंज आपके अंदर एकाग्रता को बढ़ाता है। इस खेल से जुड़े लोगों में अन्य व्यक्ति के मुकाबले एकाग्रता ज्यादा होती है। कम उम्र से अगर इस खेल को खेला जाए तो इसके परिणाम काफी अच्छे होते हैं। इसके अलावा फैसले लेने की क्षमता भी शतरंज की बिसात आपको सिखाती है, जिससे व्यक्ति के सोचने के नए आयाम खुलते हैं।
प्रतियोगिता शुभारम्भ के बाद स्पोर्ट्स आफीसर लोकेश शर्मा की देखरेख तथा रजिस्ट्रार विपिन धीमान, डॉ. मंधीर वर्मा, नीरज गर्ग, आशीष प्रताप सिंह आदि की उपस्थिति में छात्र-छात्राओं ने शतरंज की बिसात पर अपनी बौद्धिक क्षमता दिखाई। पहला सेमीफाइनल शिवा गौतम तथा सौरभ के बीच खेला गया जिसमें शिवा ने जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश किया। दूसरा सेमीफाइनल पराग उपाध्याय तथा बीटेक (सीएसई) की छात्रा वर्षा गौतम के बीच खेला गया, जिसमें पराग ने विजय दर्ज कर खिताबी दौर में जगह बनाई। अंत में फाइनल शिवा और पराग के बीच खेला गया जिसमें शिवा चैम्पियन बना।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने प्रतियोगिता के विजेताओं को शाबासी देते हुए कहा कि शतरंज का खेल आपको प्लानिंग, विश्वास, अनुशासन सिखाता है। शतरंज खेलने वाले बच्चों के अंदर गणित और विज्ञान जैसे कठिन विषयों पर अच्छी पकड़ बन जाती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जो व्यक्ति शरतंज खेलता है उसकी गणना क्षमता अच्छी हो जाती है। इसके अलावा यह खेल गहराई से सोचने तथा खोज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाने में सक्षम है, जिससे आपके अंदर की कल्पना का विकास होता है। साथ ही क्या गलत है और क्या सही इसकी समझ भी इस खेल से मिलती है।

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