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के.डी. हॉस्पिटल में हुई एक साल के बच्चे की मुश्किल सर्जरीमहाधमनी तथा रक्तवाहिनियों से निकाली 800 ग्राम की गांठलगभग पांच लाख बच्चों में किसी एक को होती है ऐसी समस्या

मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के जाने-माने विशेषज्ञ शिशु शल्य चिकित्सक श्याम बिहारी शर्मा ने सर्जरी के माध्यम से गांव कैथोरा, तहसील पहाड़ी, जिला भरतपुर (राजस्थान) निवासी भीम सिंह के एक साल के पुत्र मयंक की महाधमनी तथा रक्तवाहिनियों से चिपकी लगभग 800 ग्राम की एक गांठ निकालने में सफलता हासिल की है। इस मुश्किल ऑपरेशन पर डॉ. श्याम बिहारी शर्मा का कहना है कि इस तरह की समस्या लगभग पांच लाख बच्चों में किसी एक को होती है।
जानकारी के अनुसार कुछ समय से गांव कैथोरा, तहसील पहाड़ी, जिला भरतपुर (राजस्थान) निवासी भीम सिंह के पुत्र मयंक को पेट में दर्द रहता था तथा वह खाना भी नहीं खाता था। मां ने दर्द से कराहते बच्चे के पेट में गांठ महसूस की तथा पड़ोसियों से परामर्श लिया कि इसका सही उपचार कहां हो सकता है। उन्हीं में से एक पड़ोसी जिसके बच्चे की के.डी. हॉस्पिटल में ही सर्जरी हुई थी, उसने मयंक को के.डी. हॉस्पिटल मथुरा में दिखाने की सलाह दी। पड़ोसी की सलाह पर भीम सिंह और उसकी पत्नी बच्चे को लेकर के.डी. हॉस्पिटल आए और शिशु शल्य चिकित्सक श्याम बिहारी शर्मा से मिले। डॉ. शर्मा ने बच्चे के पेट की सोनोग्राफी तथा सीटी स्कैन कराई जिससे पता चला कि उसके बाएं गुर्दे के ऊपर एक गांठ है तथा उसमें दांत भी पता चल रहा है।
डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने परिजनों को बताया कि गांठ को निकाले बिना बच्चे का पेट दर्द कम नहीं होगा। परिजनों की सहमति के बाद 31 मई को डॉ. श्याम बिहारी शर्मा द्वारा बच्चे का काफी मुश्किल ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन के माध्यम से महाधमनी तथा रक्तवाहिनियों से चिपकी गांठ को सावधानीपूर्वक निकाल दिया गया। गांठ का वजन 800 ग्राम था तथा गांठ को काटकर देखने से पता चला कि उसमें बाल, दांत तथा मस्तिष्क का कुछ हिस्सा भी है। मेडिकल भाषा में इसे मैच्योर टैराटोमा कहा जाता है। इस ऑपरेशन में डॉ. श्याम बिहारी शर्मा का सहयोग डॉ. समर्थ, डॉ. आशीष, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. शालिनी, डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह ने किया।
बच्चा मयंक अब पूरी तरह से स्वस्थ है तथा वह खाना भी खा रहा है और अब उसे पेट दर्द भी नहीं हो रहा। पूर्ण स्वस्थ होने के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गई है। डॉ. श्याम बिहारी शर्मा का कहना है कि इस तरह की परेशानी लगभग पांच लाख बच्चों में एकाध बच्चे को ही होती है। उन्होंने कहा कि यह कैंसर नहीं होता तथा इसका पूर्ण रूप से उपचार सम्भव है। आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, प्राचार्य और डीन डॉ. आर.के. अशोका तथा उप प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने बच्चे के सफल ऑपरेशन के लिए डॉ. श्याम बिहारी शर्मा तथा उनकी टीम को बधाई देते हुए मयंक के स्वस्थ जीवन की कामना की है।
चित्र कैप्शनः मां की गोदी में बच्चा मयंक तथा सर्जरी करने वाली के.डी. हॉस्पिटल के चिकित्सकों की टीम।

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